खसरा और खतौनी क्या है?
दोनों का मतलब, फर्क, और इन्हें ऑनलाइन कैसे चेक करें — पूरी जानकारी
भारत में ज़मीन के सरकारी रिकॉर्ड को समझने के लिए 'खसरा' और 'खतौनी' — ये दो शब्द बहुत ज़रूरी हैं, खासकर ग्रामीण/कृषि भूमि के मामलों में। दोनों को अक्सर एक-दूसरे के साथ बोला जाता है, पर इनका मतलब अलग-अलग है।
खसरा बनाम खतौनी
| खसरा नंबर | ज़मीन के एक टुकड़े (plot) की यूनिक पहचान संख्या — साइज़, लोकेशन और सीमाएं दिखाती है (प्लॉट-आधारित) |
| खतौनी | किसी मालिक के नाम दर्ज सभी खसरा नंबरों की सूची — यानी एक व्यक्ति की कुल ज़मीन-जायदाद का रिकॉर्ड (मालिक-आधारित) |
खसरा-खतौनी क्यों ज़रूरी है?
ज़मीन खरीदने से पहले खसरा-खतौनी चेक करने से पता चलता है कि प्रॉपर्टी वाकई विक्रेता के नाम पर है या नहीं, उस पर कोई विवाद/कर्ज़ तो दर्ज नहीं है, और ज़मीन की सही साइज़-सीमाएं क्या हैं। यह रजिस्ट्री से पहले की बुनियादी जांच का हिस्सा है।
ऑनलाइन कैसे चेक करें
हर राज्य का अपना भूलेख/भू-अभिलेख पोर्टल है, जहां खसरा नंबर या खातेदार का नाम डालकर खतौनी की नकल ऑनलाइन देखी जा सकती है।
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