बीघा क्या होता है?
भारत की सबसे पुरानी ज़मीन-नापने की इकाइयों में से एक — पर हर राज्य में अलग साइज़
बीघा भारत में सदियों से इस्तेमाल होने वाली ज़मीन नापने की एक पारंपरिक इकाई है, जो आज भी खेती की ज़मीन, गांव के राजस्व रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी) और स्थानीय ज़मीन की खरीद-बिक्री में बहुत आम है। लेकिन एकड़ या हेक्टेयर जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत (standardised) इकाइयों के उलट, बीघा का कोई एक तय राष्ट्रीय आकार नहीं है — मुगल काल और बाद के स्थानीय रियासतों के हिसाब से इसका साइज़ राज्य-दर-राज्य, और कई जगह एक ही राज्य के अलग-अलग ज़िलों में भी अलग-अलग तय हुआ।
इसका मतलब है कि '1 बीघा में कितने वर्ग फीट होते हैं' का कोई एक सही जवाब नहीं है — जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस राज्य/ज़िले की बात कर रहे हैं। नीचे कुछ प्रमुख राज्यों के आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले मान दिए गए हैं।
1 बीघा = 20 बिस्वा = 400 बिस्वांसी (ज़्यादातर राज्यों में)
बीघा को आगे बिस्वा और बिस्वांसी में बांटा जाता है — छोटे टुकड़ों की ज़मीन नापने के लिए। ज़्यादातर राज्यों में 1 बीघा = 20 बिस्वा, और 1 बिस्वा = 20 बिस्वांसी होता है (असम जैसे कुछ राज्यों में यह अनुपात अलग है)।
कुछ राज्यों में बीघा का आम मान (वर्ग फीट में)
| असम | 14,400 वर्ग फीट |
| उत्तर प्रदेश | 27,000 वर्ग फीट |
| उत्तराखंड | 7,560 वर्ग फीट |
| गुजरात | 17,424 वर्ग फीट |
| पंजाब | 9,075 वर्ग फीट |
| पश्चिम बंगाल | 14,400 वर्ग फीट |
ये आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले मान हैं। रजिस्ट्री से पहले हमेशा अपने तहसील/पटवारी रिकॉर्ड से स्थानीय बीघा का सही साइज़ पक्का कर लें, क्योंकि कई इलाकों में यह अलग हो सकता है।